कोरोना संकट में जज्बे की 2 मिसालें
कोरोना संकट में जज्बे की 2 मिसालें अपनों के तानों को अनसुना कर बचत के पैसों से मंदिर-मस्जिद को सैनिटाइज कर रहीं उज्मा, 80 साल के कुली मुजीबुल्ला ने फ्री में मजदूरों का लगेज उठाया
- लखनऊ के सआदतगंज की रहने वाली उज्मा परवीन हर दिन समय निकालकर लखनऊ में मोहल्लों को सैनिटाइज करती हैं
- उज्मा ने अब तक 20 मंदिर, 8-10 मस्जिद, पांच गुरुद्वारे समेत 20 क्षेत्रों को सैनिटाइज करने का काम किया
- कुली मुजीबुल्ला के नेक काम के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने पत्र लिखकर बधाई दी, लिखा- इसी जज्बे से हारेगा कोरोना
दैनिक भास्कर
Jun 10, 2020, 01:30 PM ISTलखनऊ. कोरोना संकट में जरूरतमंदों की मदद के लिए कई चेहरे सामने आए। इन्होंने जाति-मजहब से परे कौमी एकता की मिसाल पेश की। लखनऊ की सईद उज्मा परवीन व कुली मुजीबुल्ला की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। शरीर से दुबली-पतली उज्मा हर दिन अपनी पीठ पर 20 लीटर वाली स्प्रेयर मशीन लादकर पुराने लखनऊ की उन तंग गलियों में पहुंच जाती हैं, जहां नगर निगम की टीम ने सैनिटाइजेशन से हाथ खड़े कर दिए थे। उज्मा ने इस काम में न तो मजहब का भेद रखा न ही ऊंच-नीच का।
44 दिन में उज्मा ने लखनऊ के 20 मंदिर, 8-10 मस्जिद, पांच गुरुद्वारे समेत 20 उन क्षेत्रों को सैनिटाइज करने का काम किया है। उसे अपनों से ताने भी मिले लेकिन उसने कमजोर करने वाले लफ्जों को अनसुना कर दिया और हर सुबह नई उर्जा के साथ अपने काम में जुट गई।
इससे पहले उज्मा नागरिकता संशोधन कानून के विरोध को लेकर सुर्खियों में आई थी। उसे घंटाघर में 'झांसी की रानी' की संज्ञा दी गई थी। इसी तरह चारबाग रेलवे स्टेशन पर कुली मुजीबुल्ला ने मजदूरों का फ्री में लगेज उठाया।
कहानी 1: पुराने लखनऊ की तंग गलियों को सैनिटाइज करने में खर्च किए 4 लाख
उज्मा कहती हैं, "लखनऊ में तमाम इलाके ऐसे हैं, जहां सरकारी व्यवस्था पहुंचने में दिक्कत होती है। इस आपदा में मुझे लगा कि जो भी भागीदारी मैं निभा सकूं वह करना चाहिए। इसलिए मैंने इस काम की शुरुआत की।
दिन में करीब दो से चार घंटे तक इसके लिए समय देती हूं। पहले दिन मैंने फैजुल्लागंज स्थित सीता-राम मंदिर को सैनिटाइज कर अपने काम की शुरुआत की थी। इस दौरान लोगों ने कई बार ताने दिए कि महिलाएं ऐसा नहीं कर पाएंगी ये दो तीन दिन का ही दिखावा है। लेकिन अब उन्हीं लोगों के फोन आते हैं कि कहीं मेरी मदद लेनी होगी तो बताइएगा।"
उज्मा यह काम बीते 26 अप्रैल से कर रही हैं। अब तक लखनऊ के 20 से ज्यादा इलाकों को सैनिटाइज किया हैं, जहां नगर निगम की टीम नहीं पहुंच पा रही है। बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन, फैजुल्लागंज, बालागंज, कैम्पल रोड, जमा मस्जिद, खदरा, ठाकुरगंज, सहादतगंज, मंसूर नगर इलाको में खुद जाकर सैनिटाइज किया है।
कहानी 2: 80 साल के कुली मुजीबुल्ला ने फ्री में उठाया लगेज
देश में लॉकडाउन से पहले ही ट्रेनें चलना बंद हो गईं थीं। इससे रेलवे स्टेशनों पर तमाम कुली बेरोजगार हो गए। चारबाग रेलवे स्टेशन पर 16 नंबर बिल्ला लगाकर काम करने वाले 80 साल के मुजीबुल्ला भी उनमें से एक थे। लेकिन, जब 3 मई से श्रमिक स्पेशल ट्रेनों की शुरुआत हुई थी तो मुजीबुल्ला मजदूरों की मदद के लिए आगे आए। उन्होंने सुबह से रात तक मजदूरों का लगेज फ्री में उठाया। इस काम में उन्होंने जाति, धर्म का कोई भेद नहीं किया।

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