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Showing posts from June 13, 2020

भारत-नेपाल बॉर्डर के आखिरी गांव से ग्राउंड रिपोर्ट

भारत-नेपाल बॉर्डर के आखिरी गांव से ग्राउंड रिपोर्ट /  मानसरोवर यात्रा की कमान चीन के हाथ में; वही तय करता है, कितने यात्री आएंगे, कितने दिन रुकेंगे, सड़क बनने से हमें सिर्फ सहूलियत होगी 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध के बाद 80 के दशक में यात्रा दोबारा शुरू की गई, तब से पहली बार मानसरोवर यात्रा पूरी तरह बंद रहेगी लिपुलेख दर्रे से 1000 यात्रियों को मानसरोवर जाने की अनुमति मिलती है, वहीं नेपाल से 20-30 हजार यात्री हर साल जाते हैं, अधिकतर भारतीय भी यहीं से जाते हैं

कोरोना संकट में जज्बे की 2 मिसालें

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कोरोना संकट में जज्बे की 2 मिसालें  अपनों के तानों को अनसुना कर बचत के पैसों से मंदिर-मस्जिद को सैनिटाइज कर रहीं उज्मा, 80 साल के कुली मुजीबुल्ला ने फ्री में मजदूरों का लगेज उठाया लखनऊ के सआदतगंज की रहने वाली उज्मा परवीन हर दिन समय निकालकर लखनऊ में मोहल्लों को सैनिटाइज करती हैं उज्मा ने अब तक 20 मंदिर, 8-10 मस्जिद, पांच गुरुद्वारे समेत 20 क्षेत्रों को सैनिटाइज करने का काम किया कुली मुजीबुल्ला के नेक काम के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने पत्र लिखकर बधाई दी, लिखा- इसी जज्बे से हारेगा कोरोना दैनिक भास्कर Jun 10, 2020, 01:30 PM IST लखनऊ.  कोरोना संकट में जरूरतमंदों की मदद के लिए कई चेहरे सामने आए। इन्होंने जाति-मजहब से परे कौमी एकता की मिसाल पेश की। लखनऊ की सईद उज्मा परवीन व कुली मुजीबुल्ला की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। शरीर से दुबली-पतली उज्मा हर दिन अपनी पीठ पर 20 लीटर वाली स्प्रेयर मशीन लादकर पुराने लखनऊ की उन तंग गलियों में पहुंच जाती हैं, जहां नगर निगम की टीम ने सैनिटाइजेशन से हाथ खड़े कर दिए थे। उज्मा ने इस काम में न तो मजहब का भेद रखा न ही ऊंच-नीच का। 44...

बॉर्डर मीटिंग में भारत के लेफ्टिनेंट जनरल के सामने चीन से मेजर जनरल आने पर देश में गुस्सा, लेकिन यह बात रैंक नहीं, रोल की है

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एक्सपर्ट एनालिसिस /  बॉर्डर मीटिंग में भारत के लेफ्टिनेंट जनरल के सामने चीन से मेजर जनरल आने पर देश में गुस्सा, लेकिन यह बात रैंक नहीं, रोल की है नई दिल्ली.  भारत-चीन के बीच जो कुछ लद्दाख में चल रहा है, वह अलग तरह का तेवर है। हफ्तों तक जारी तनाव, सेनाओं का आमना-सामना, धक्का-मुक्की, बहस और गुस्सा अब धीमा पड़ रहा है, शायद। और देखा जाए तो ये ठीक भी है। क्योंकि कोई नहीं चाहता कि सरहद के हालात बिगड़ें और झड़प में बदल जाएं, भले वह कितना ही सीमित हो। भारत और चीन दो देश हैं, जिनकी सीमाएं अब तक अनसुलझी हैं। 23 ऐसे इलाके हैं, जिन्हें दोनों देश अपना बताते हैं। यही इलाके विवाद की जड़ हैं, जहां पहले भी हमारे सैनिकों के बीच झड़प हुई हैं। इसके बावजूद पिछले पचास सालों में यहां एक भी गोली नहीं चली है। इसके उलट पाकिस्तान से सटी नियंत्रण रेखा, जहां सरहद साफ है। दोनों देश जिसे लेकर राजी हैं, लेकिन फिर भी भयानक गोलीबारी से लेकर हर तरह की ताकत वाले हथियारों का इस्तेमाल यहां आए दिन होता है। कभी आतंकियों की घुसपैठ रोकने के लिए, तो कभी किसी और वजह से। आखिर कैसे संभव हो पाता है ये? हमारा ग्राउंड ल...

महाराष्ट्र में बड़ी लापरवाही / कोरोना पॉजिटिव मां का 11 दिन तक इलाज नहीं किया, दादी 9 दिनों तक हॉस्पिटल के बाथरूम में पड़ी रहीं, वहीं से लाश मिली

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महाराष्ट्र में बड़ी लापरवाही /  कोरोना पॉजिटिव मां का 11 दिन तक इलाज नहीं किया, दादी 9 दिनों तक हॉस्पिटल के बाथरूम में पड़ी रहीं, वहीं से लाश मिली 30 मई की रात मां बाथरूम गईं तो वहीं गिर गईं, दो घंटे तक बाथरूम में बेहोश पड़ी रहीं, होश आने पर खुद ही उठकर अपने बेड पर पहुंचीं 2 जून को अस्पताल से फोन आया की दादी बेड पर नहीं हैं, पुलिस में रिपोर्ट दर्ज की, 10 मई को बोले- बाथरूम में दादी की लाश मिली है नईदिल्ली.  देश में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है महाराष्ट्र। वहीं के जलगांव जिले में एक परिवार के दो सदस्यों की मौत कोरोना से हुई है। लेकिन कहानी सिर्फ इतनी ही नहीं है। मौत की वजह कोरोना से ज्यादा अस्पताल की लापरवाही है। जिन दो सदस्यों की यहां बात हो रही है वह हर्षल नेहटे की मां और दादी हैं।   मैं पुणे में पत्नी के साथ रहता हूं। पत्नी नौ माह की गर्भवती है। पापा, मम्मी और दादी भुसावल में रहते थे। पापा दो साल पहले ही रेलवे से रिटायर हुए हैं। वो रेलवे में ड्राइवर थे। रिटायर होने के बाद इटारसी से भुसावल आ गए। कोरोनावायरस ने सिर्फ 20 दिनों में मेरे पूरे परिवार को बर्बाद क...

3 साल के बच्चे ने अकेले पूरा किया सफर

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3 साल के बच्चे ने अकेले पूरा किया सफर /  97 दिन बाद लौटा तो मां ने बेटे को एयरपोर्ट अराइवल गेट पर गले लगाना चाहा, एयरलाइन स्टाफ ने रोका, आईडी चेक की तब हवाले किया साढ़े तीन साल का माधव और 13 साल की दिव्यांशी 8 मार्च को नानी के घर मोदीनगर, गाजियाबाद गए थे, 23 मार्च को लौटना था, लेकिन लॉकडाउन हो गया बच्चों के मामा ने उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट छोड़ा, वहां से इंडिगो स्टाफ ने बच्चों की जिम्मेदारी संभाली और पूरे रास्ते परिवार की तरह ही ख्याल रखा भोपाल.  दोपहर 3 बजकर 15 मिनट…इंडिगो की दिल्ली फ्लाइट राजा भोज एयरपोर्ट के रनवे पर उतर चुकी थी। इस फ्लाइट से उतरे यात्री सेल्फ डिक्लेयरेशन फॉर्म भरने के बाद अपनी थर्मल स्क्रीनिंग कराकर बाहर निकल रहे थे। इस दौरान अराइवल गेट के बाहर दंपति टकटकी लगाए खड़े थे।   जब उनसे बात की तो पता चला वे अपने बच्चों को लेने आए हैं। दोपहर 3 बजकर 40 मिनट पर इंडिगो का स्टाफ दो बच्चों की थर्मल स्क्रीनिंग कराकर उन्हें अराइवल गेट पर लाया। 97 दिन बाद अपने बच्चों को सामने देखकर मां के चेहरे पर जो खुशी थी वो देखने लायक थी। मां ने दौड़कर अपने साढ़े तीन साल के बेटे को गले ल...

कोरोना के चलते यतीम होते बच्चे

कोरोना के चलते यतीम होते बच्चे /  21 बच्चे लॉकडाउन में पहुंचे शेल्टर होम, जिसमें 4 नवजात भी, इनके माता-पिता इन्हें सड़क पर छोड़ गए कोई अपने नवजात को अडॉप्शन सेंटर में छोड़कर जा रहा है, तो कोई अपने बच्चों को किसी गांव में या फिर सड़क पर लावारिस रखकर चला जा रहा है। समरुति 45 दिन की है और उससे थोड़ी ही छोटी रेखा है, जिसकी उम्र 34 दिन है, दोनों की मां ने इन्हें सरेंडर कर दिया, यानी पाल नहीं सकतीं टोला-भाटीपाड़ा के पास मां-बाप पांच भाई-बहनों को रात में सोता हुआ छोड़ गए, सबसे बड़ी बच्ची की उम्र 16 साल सुंदरगढ़.  पहली कहानी ओडिशा के सुंदरगढ़ से... समरुति, रेखा, निशांत, आदिल, कुसुम, समीर, वर्षा, कुणाल, कुम, बिरजिनिया, निखिल... ऐसे 21 नाम हैं। ये कुछ उन यतीम बच्चों के नाम हैं, जो लॉकडाउन के बीच सुंदरगढ़ में बिसरा के ‘दिशा शेल्टर होम' में पहुंचे हैं। लहुनीपाड़ा की समरुति 45 दिन की है और उससे थोड़ी ही छोटी खटकुल बहाल की रेखा है, जिसकी उम्र महज 34 दिन है। दोनों की मां ने उन्हें सरेंडर कर दिया, यानी ये मांएं खुद अपने बच्चे को पाल नहीं सकतीं। कोरोना इन बच्चों के लिए कहर साबित हुआ है। खासकर गरीब बच...

मुंबई v/s न्यूयॉर्क / भारत में कोरोना से कुल मौत की 23% मुंबई में, डेथ रेट 3.68%; अमेरिका की 22% मौतें न्यूयॉर्क में, डेथ रेट 6.41%

मुंबई v/s न्यूयॉर्क /  भारत में कोरोना से कुल मौत की 23% मुंबई में, डेथ रेट 3.68%; अमेरिका की 22% मौतें न्यूयॉर्क में, डेथ रेट 6.41% न्यूयॉर्क से घनी है मुंबई की बसाहट, मुंबई में हर एक किमी के दायरे में 33 हजार से ज्यादा लोग रहते हैं, जबकि न्यूयॉर्क की आबादी 85 लाख के आसपास ही है कोरोना की रफ्तार न्यूयॉर्क में तो घटनी शुरू हो गई है, लेकिन मुंबई में लगातार बढ़ती जा रही है, न्यूयॉर्क की तुलना में मुंबई का पॉजिटिविटी रेट भी ज्यादा है भोपाल.  देश की आर्थिक राजधानी मुंबई कोरोना की सबसे बुरी मार झेल रही है। अकेले मुंबई में 13 जून तक कोरोना के 55 हजार 451 मामले आ चुके हैं, जबकि महाराष्ट्र में संक्रमितों का आंकड़ा 1 लाख के पार पहुंच गया है। महाराष्ट्र में 3 हजार 717 मौतें हो चुकी हैं, जिसमें से 55% यानी 2 हजार 44 मौतें सिर्फ मुंबई में ही हुईं। देश में कुल संक्रमितों की संख्या 3 लाख 8 हजार 993 हो गई है। इसमें से 17% मामले तो अकेले मुंबई में ही हैं। इतना ही नहीं, जितने मामले और मौतें मुंबई में हुई हैं, उतने मामले और मौतें तो देश के 30 राज्यों में भी नहीं हुई। देश में 13 जून तक 8 हजार 88...