भारत-नेपाल बॉर्डर के आखिरी गांव से ग्राउंड रिपोर्ट
भारत-नेपाल बॉर्डर के आखिरी गांव से ग्राउंड रिपोर्ट / मानसरोवर यात्रा की कमान चीन के हाथ में; वही तय करता है, कितने यात्री आएंगे, कितने दिन रुकेंगे, सड़क बनने से हमें सिर्फ सहूलियत होगी 1962 में हुए भारत-चीन युद्ध के बाद 80 के दशक में यात्रा दोबारा शुरू की गई, तब से पहली बार मानसरोवर यात्रा पूरी तरह बंद रहेगी लिपुलेख दर्रे से 1000 यात्रियों को मानसरोवर जाने की अनुमति मिलती है, वहीं नेपाल से 20-30 हजार यात्री हर साल जाते हैं, अधिकतर भारतीय भी यहीं से जाते हैं