20 घंटे घर पर पड़ा रहा पॉजिटिव मरीज का शव
20 घंटे घर पर पड़ा रहा पॉजिटिव मरीज का शव / पिता को एडमिट कराने बेटा 2 घंटे फोन लगाता रहा, इलाज नहीं मिला तो मौत हो गई, 38 घंटे बाद हुआ अंतिम संस्कार
- एम्बुलेंस बुलवाने के लिए विधायक से लेकर सांसद के पीए तक को फोन लगवाना पड़ा, शव के पास से आने लगी थी बदबू
- परिवार के ही दो सदस्यों ने पीपीई किट पहनकर शव को एम्बुलेंस में रखा और जीटीबी हॉस्पिटल तक छोड़कर आए

अक्षय बाजपेयी
Jun 17, 2020, 06:00 AM ISTनईदिल्ली. दिल्ली में एक बेटा अपने पिता को हॉस्पिटल में एडमिट करवाने के लिए दो घंटे तक दिल्ली सरकार के दिए नंबरों पर फोन करता रहा लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इलाज नहीं मिला तो पिता की मौत हो गई। मौत के बाद एम्बुलेंस बुलाने के लिए विधायक से लेकर सांसद के पीए तक को फोन लगा दिया। बावजूद इसके 20 घंटे तक शव घर में ही पड़ा रहा और 38 घंटे बाद अंतिम संस्कार हो पाया।

दिल्ली में रहने वाले राकेश पांडे के पिता हीरा पांडे को 11 जून को हल्की खांसी और बुखार था। बेटे ने उन्हें पास के एक डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने कहा कि वायरल फीवर है और दवाई देकर घर भेज दिया।
मन में कोरोना की शंका होने पर राकेश ने एक प्राइवेट लैब में 13 जून को पिता का कोरोना टेस्ट कराया। लैब ने कोरोना के साथ ही एक-दो और टेस्ट भी कर डाले। पांच हजार रुपए का बिल बनाया।
लैब ने 14 जून को शाम 7 बजे वॉट्सऐप पर रिपोर्ट भेज दी। हीरा पांडे कोरोना पॉजिटिव आए। इसके बाद बेटा उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट करने की कोशिशों में लग गया। दिल्ली सरकार द्वारा जारी किए गए नंबरों पर फोन लगाने लगा। लिस्ट में जितने नंबर थे सब पर ट्राय किया लेकिन कोई नंबर लगा ही नहीं तो कोई बिजी आता रहा। हॉस्पिटल में किसी ने फोन ही नहीं उठाया।

पिता कोरोना पॉजिटिव थे, इसलिए परिवार चाहता था कि एम्बुलेंस से उन्हें हॉस्पिटल ले जाया जाए। दो घंटे तक कहीं से कोई जवाब नहीं मिला और रात 10 बजे के करीब हीरा पांडे की मौत हो गई। परिवार सदमे में था और रातभर उनके शव के सामने बैठकर रोता रहा।
शव खुला रखा था। घर में 12 सदस्य थे। इसलिए कोरोना का डर भी था। सुबह 6 बजे से एम्बुलेंस के लिए फोन करना शुरू कर दिया लेकिन कहीं से जवाब ही नहीं मिल रहा था। पड़ोसी बलबीर सिंह ने विधायक से लेकर सांसद के पीए तक को एम्बुलेंस के लिए फोन किया। काफी कोशिशों के बाद शाम 5 बजे एम्बुलेंस आई। लेकिन इसमें सिर्फ ड्राइवर ही आया था।
परिवार के ही दो सदस्यों ने पीपीई किट पहनकर शव को एम्बुलेंस में रखा और जीटीबी हॉस्पिटल तक छोड़कर आए। परिवार से कहा गया कि निगम बोध शमशान में अंतिम संस्कार करना है तो तीन से चार दिन लगेंगे। तब तक शव मरचुरी में रखना होगा। और सीमापुरी श्मशान में कल ही संस्कार हो जाएगा।
मौत के करीब 38 घंटे बाद 16 जून को दोपहर 12 बजे अंतिम संस्कार हो पाया। परिवार की जांच के लिए अभी तक कोई नहीं आया है। हां जिस हॉस्पिटल को वो पिछले तीन दिनों से लगातार फोन लगा रहे थे वहां से किसी का फोन आया था। कह रहे थे कि कल आप लोगों का टेस्ट करेंगे।

राकेश कहते हैं, क्या पता कल टेस्ट होगा या नहीं। अभी हम सब घर में ही एक साथ हैं। बच्चे भी हैं। पिताजी के साथ जो हुआ, उसे लेकर बहुत डर है। डर यही है कि कोरोना पॉजिटिव आ गए तो क्या पता समय पर इलाज मिल भी सकेगा या नहीं।
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