महाराष्ट्र में इस साल नहीं होगा दही हांडी उत्सव,
कोरोना का असर / महाराष्ट्र में इस साल नहीं होगा दही हांडी उत्सव, संक्रमण को देखते हुए समन्वय समिति का फैसला
- पुलिस ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव (अष्टमी पूजा) को सरल तरीके से मनाने का निर्देश दिया है
- दही हांडी समन्वय समिति के बाला पडेलकर ने बताया कि इसमें भारी संख्या में लोग एक जगह जमा होते हैं इससे संक्रमण का खतरा
दैनिक भास्कर
Jun 25, 2020, 08:12 PM ISTमुंबई. कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच राज्य में भव्य तरीके से होने वाला दही हांडी उत्सव रद्द कर दिया गया है। यह फैसला दही हांडी समन्वय समिति की ओर से लिया गया है। हालांकि, कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा सादे तरीके से की जाएगी। संभागीय पुलिस अधिकारियों ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव (अष्टमी पूजा) को सरल तरीके से मनाने का निर्देश दिया है।
दही हांडी समन्वय समिति के बाला पडेलकर ने बताया कि कोरोना के खतरे को देखते हुए इस साल दही हांडी उत्सव नहीं मनाने का फैसला लिया गया है। बाला पडेलकर ने बताया कि इसमें भारी संख्या में लोग एक जगह जमा होते हैं और एक दूसरे के क्लोज कांटेक्ट में रहते हैं। इससे कोरोना का खतरा और बड़ा हो सकता है। इसलिए कमेटी ने इस साल दही हांडी उत्सव नहीं करवाने का फैसला लिया है। उन्होंने यह भी साफ किया कि इस फ़ैसले पर पुनर्विचार नही किया जाएगा।
समिति ने कहा- हमारा आदेश पूरे राज्य में मान्य होगा
दही-हांडी समन्वय समिति के अरुण पाटिल ने कहा, 'महाराष्ट्र में करीब 1100-1200 दही हांडी मंडल हैं। इसमें अधिकांश मुंबई और ठाणे जिले के हैं। हमने जो निर्णय लिया है वह महाराष्ट्र व मंडल के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के हित में लिया है। जिसका पालन राज्यभर के मंडल करेंगे इसमें हमें कोई शंका नहीं है। क्योंकि, कोरोना महामारी पूरी दुनिया में है और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी है। दही-हांडी समन्वय समिति नहीं चाहती है कि जिस उत्सव की वजह से पूरी दुनिया मुंबई व महाराष्ट्र की अलग पहचान है। उससे कोरोना वायरस का संक्रमण फैले।
क्या है दही-हांडी उत्सव?
इस उत्सव को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर मनाया जाता है। लड़कों का ग्रुप मैदान, सड़क या कम्पाउंड में इकट्ठा होता है और एक पिरामिड बनाकर जमीन से 20-30 फुट ऊंचाई पर लटकी मिट्टी की मटकी को तोड़ते है। महाराष्ट्र और गुजरात में माखन हांडी की प्रथा काफी प्रसिद्ध है, जहां मटकी को दही, घी, बादाम और सूखे मेवे से भरकर लटकाया जाता है।
1907 में मुंबई में शुरू हुई थी दही हांडी की परंपरा
यह माना जाता है कि नवी मुंबई के पास घणसोली गांव में यह परंपरा पिछले 104 वर्षों से चली आ रही है। यहां सबसे पहले 1907 में कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर दही हांडी शुरू हुई थी। मायानगरी ने हर साल होने वाली दही हांडी उत्सव की धूम पूरी दुनिया में हैं। सिर्फ देश ही नहीं विदेश से भी लोग यहां दही हांडी उत्सव देखने आते हैं। हर दही हांडी मंडल हांडी फोड़ने पर कुछ मंडल करोड़ों का इनाम भी दिए जाते हैं।
Comments
Post a Comment