सैनिक स्कूल में पढ़े आतंकवादी का एनकाउंटर
सैनिक स्कूल में पढ़े आतंकवादी का एनकाउंटर / आर्मी अफसर ने एक साल पहले आतंकी के घरवालों से कहा था कि बेटे को वापस बुला लें, घर वाले भी यही चाहते थे; लेकिन बेटे ने हिजबुल का साथ नहीं छोड़ा
- दक्षिण कश्मीर में सुरक्षाबलों ने मंगलवार को हिजबुल मुजाहिदीन के तीन आतंकियों को मार गिराया, इसमें आतंकी कामरान भी शामिल है
- कमांडिंग ऑफिसर कर्नल एके सिंह मई 2019 में कामरान के घर गए थे, परिवार वालों से कहा था- बेटे को घर आने के लिए मनाएं
जफर इकबाल
Jun 16, 2020, 09:28 PM ISTश्रीनगर. सैनिक स्कूल में पढ़ा कामरान कुछ लोगों के संपर्क में आया और फिर हिजबुल मुजाहिदीन का आतंकी बन गया। सुरक्षाबलों ने मंगलवार को उसे दो अन्य आतंकियों के साथ मार गिराया। तीन आतंकियों में से सिर्फ कामरान का जिक्र यहां इसलिए किया जा रहा है क्योंकि ठीक एक साल पहले एक आर्मी अफसर ने कामरान के घर जाकर परिवारवालों से उसे वापस घर बुलाने का निवेदन किया था।
कमांडिंग अफसर कर्नल एके सिंह मई 2019 में कामरान के परिवार वालों से मिले थे। आज जब कामरान की मौत हुई तो इस मुलाकात का वीडिया दैनिक भास्कर के हाथ लगा।
कर्नल एके सिंह इस वीडियो में कहते दिखाई दे रहे हैं, "कामरान भी सैनिक स्कूल में पढ़ा हुआ है और मैं भी। वह गलत रास्ते पर चला गया है। आप लोग कहेंगे तो समझेगा। पिता की बात का बड़ा फर्क पड़ता है।"
वीडियो में घरवाले रोते-बिलखते हुए यह कहते दिखाई दे रहे हैं कि जब से कामरान घर से गया है, हमारी आंखों से आंसू नहीं सूख रहे हैं। पूरा परिवार खत्म हो गया है। बस अब चाहते हैं कि वह वापस लौट आए।
कामरान ने घरवालों की बात नहीं मानी और इस मंगलवार को सुरक्षाबलों के हाथों मार गिराया गया। कामरान के साथ हिजबुल मुजाहिदीन का टॉप कमांडर जुबैर वानी भी मारा गया है।

पिछले कुछ हफ्तों में सुरक्षाबलों ने खूफिया और सटीक तकनीकि जानकारी के आधार पर बिना किसी जवान को खोए कई आतंकियों और कमांडरों को मार गिराया है। विक्टर फोर्स के जनरल ऑफिसर कमांडिंग जनरल ए सेनगुप्ता बताते हैं कि पिछले 15 दिनों में 24 आतंकी मारे गए हैं और इस दौरान एक भी जवान शहीद नहीं हुआ और न ही आम आदमी और संपत्ति को कोई नुकसान पहुंचा है।
यहां सुरक्षाबल कामरान की तरह ही कई आतंकियों को मारने से पहले इन्हें सरेंडर करने का मौका देते हैं। पिछले कुछ हफ्तों से आर्मी अफसर लगातार दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकियों के घर पहुंच रहे हैं और परिवारवालों को इन आतंकियों को समझाने, हिंसा का रास्ता छोड़कर सरेंडर करने के लिए मनाने की समझाइश दे रहे हैं। जो आतंकी घर वापसी करने को तैयार होता है उसकी मदद भी की जाती है।
जनरल ए सेनगुप्ता बताते हैं, "हम आतंकियों के घर जाकर परिवार वालों से निवेदन करते हैं कि वे अपने बच्चों को आतंक का रास्ता छोड़ने और फिर से घर आने के लिए मनाएं। तब ही घाटी में शांति होगी।"

आतंकियों की घर वापसी की ये कोशिशें तब शुरू हुईं जब 2019 में लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस डिल्लन 15 कार्प्स के कमांडर थे। यहां “ऑपरेशन मां” के तहत आतंक की राह पर जा चुके भटके युवाओं को फिर घर बुलाने की मुहिम शुरू की गई। पिछले साल इसी ऑपरेशन के तहत 50 कश्मीरी युवाओं के आतंकी संगठनों को छोड़ घर वापस आने का दावा किया गया था। कुछ ने घरवालों की बात मानीं और कुछ ने नहीं..
फिलहाल कामरान को दफनाने की तैयारी है। मंगलवार को हुए एनकाउंटर की जानकारी देते हुए कश्मीर के इंस्पेक्टर जनरल विजय कुमार ने बताया, “हमने आतंकियों के घर वालों से अपील की है कि वे आएं और मृत व्यक्ति की पहचान करें। पहचान के बाद आतंकी को बारामुला में दफनाया जाएगा।” नई एसओपी के तहत आतंकी के मृत शरीर को घरवालों को नहीं सौंपा जाता है।
Comments
Post a Comment