हमारे देश में लोकतंत्र है इसलिए

एनालिसिस / हमारे देश में लोकतंत्र है इसलिए हम बता देते हैं, लेकिन चीन कभी नहीं बताएगा कि उसके कितने सैनिक मारे गए हैं

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  • रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल नरसिम्हन के मुताबिक, पाकिस्तान से सटी लाइन ऑफ कंट्रोल के उलट चीन से लगी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर गोली चलने की घटनाएं आम नहीं है
  • रिटायर्ड ले.जन. दुआ बताते हैं- महीनेभर से दोनों सेनाएं हाई एल्टीट्यूड और सख्त मौसम के बीच हैं, मुमकिन है तनाव हद पार कर गया

दैनिक भास्कर

Jun 16, 2020, 05:41 PM IST

नई दिल्ली. सोमवार रात लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर तनाव अपनी हदें पार कर गया। 45 साल बाद सीमा पर विवाद में किसी सैनिक की जान गई है। भारत-चीन सीमा की घटना पर 2 रिटायर्ड जनरल का एनालिसिस -

चीन से लगी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर गोली चलने की घटनाएं आम नहीं है- रिटायर्ड ले. जन एस एल नरसिम्हन

(वे चीन से जुड़े मामलों के डिफेंस एक्सपर्ट हैं, नेशनल सिक्योरिटी एडवायजरी बोर्ड के मेंबर और सेंटर फॉर कंटेमपररी चाइना स्टडीज के डायरेक्टर जनरल भी हैं)

15 जून की शाम मामले को सुलझाने की प्रक्रिया चल रही थी। तभी झड़प हुई, जिसमें एक ऑफिसर और 2 जवानों की हत्या हो गई। सेना के सीनियर लीडर मसले को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। उम्मीद है जल्दी ही मामला सुलझ जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन के भी सैनिक मारे गए हैं। लेकिन कितने, ये जानने के लिए कुछ वक्त लगेगा। क्योंकि चीन कभी खुद ये बात नहीं बताएगा। हमारे देश में लोकतंत्र है और हम बता देते हैं कि हमने कितने सैनिकों को खोया, लेकिन वो कभी नहीं बताते।

पाकिस्तान से सटी लाइन ऑफ कंट्रोल के उलट चीन से लगी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर गोली चलने की घटनाएं आम नहीं है। गोली सोमवार शाम भी नहीं चली है। यानी जो मौतें हुई हैं, उसका कारण हाथापाई हो सकता है। इस घटना के चलते भारत-चीन के बीच जिस मसले को सुलझाने की कोशिश एक महीने से भी ज्यादा वक्त से हो रही है, वह अब और ज्यादा लंबी खिंचेगी। सबकुछ सामान्य होने में देरी होगी।

रिटायर्ड ले.जन नरसिम्हन ने भास्कर के लिए लिखा था ये आर्टिकल -
दुनिया की सबसे लंबी अनसुलझी सीमा / 1967 के बाद से भारत-चीन सीमा पर एक भी गोली नहीं चली, 1986 के 27 साल बाद 2013 से फिर होने लगे विवाद

महीनेभर से दोनों सेनाएं हाईएल्टीट्यूड और सख्त मौसम के बीच हैं, मुमकिन है तनाव हद पार कर गया- रिटायर्ड ले जन सतीश दुआ

(वे कश्मीर के कोर कमाडंर रह चुके हैं। जनरल दुआ ने ही सर्जिकल स्ट्राइक की प्लानिंग की और उसे एग्जीक्यूट करवाया। वे चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के पद से रिटायर हुए हैं।)

जहां सोमवार को ये घटना हुई, वह हाई एल्टीट्यूड का सर्द इलाका है, एक महीने से दोनों फोर्स खुले में रह रहे हैं। मौसम सख्त है। तनाव है। चीन और भारत एक दूसरे के नजदीक हैं तो मुमकिन है कि तनाव इतना बढ़ गया कि हद पार कर गया है।  

ये दुखद घटना है कि एलएसी पर भारतीय सेना ने कर्नल समेत तीन सोल्जर्स को खो दिया। इस समय जो इंफॉर्मेशन है, वो बहुत कम है। ऐसी सेंसेटिव हालत में बेतुके अनुमान न लगाएं। हमें जिम्मेदारीभरा बर्ताव करना चाहिए।

भारत और चीन की जो भी झड़प हुई हैं, उनमें हम ये गर्व से महसूस करते रहे हैं कि हालात भड़के नहीं, लेकिन इस बार दोनों ओर स्थिति खराब हो गई। ये सिर्फ एक इलाके में हुआ है, रिपोर्ट ये भी है कि फायरिंग नहीं हुई है।

ये गंभीर स्थिति है और इससे और ज्यादा गंभीरता से निपटना है ताकि हालात सामान्य हो सकें। 1967 में सीमा पर एक बड़ा ऑपरेशन हुआ था नाथुला पर। इसके बाद 1975 में अरुणाचल में और उसके बाद तो भारत और चीन सीमा पर एक भी गोली नहीं चली।

रिटायर्ड ले.जन दुआ ने भास्कर के लिए लिखा था ये आर्टिकल -
बॉर्डर मीटिंग में भारत के लेफ्टिनेंट जनरल के सामने चीन से मेजर जनरल आने पर देश में गुस्सा, लेकिन यह बात रैंक नहीं, रोल की है

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