सुशांत की तेरहवीं

सुशांत की तेरहवीं / बेटे को याद कर भावुक परिवार ने कहा- वह हमारा प्यारा ‘गुलशन’ था, अब उसकी हंसी कभी नहीं सुन पाएंगे

  • सुशांत ने मुंबई स्थित फ्लैट में 14 जून को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी
  • सुशांत की विरासत को संजोने के लिए एक फाउंडेशन बनाया जाएगा, जिसमें सिनेमा, साइंस और स्पोर्ट्स से जुड़ी प्रतिभाओं को मौका मिलेगा

दैनिक भास्कर

Jun 28, 2020, 05:29 AM IST

सुशांत सिंह राजपूत को दुनिया से गए 13 दिन बीत चुके हैं। उनकी तेरहवीं पर उनके परिवार ने एक स्टेटमेंट जारी किया है। इसमें सुशांत को आखिरी गुडबाय कहने के साथ कई अन्य सारी बातें भी कही गई हैं। 

गुडबाय सुशांत!

दुनिया के लिए सुशांत सिंह राजपूत हमारा प्यारा गुलशन (सुशांत का निकनेम)था। वह खुले दिल का, बातूनी और तेज दिमाग वाला था। उसे हर चीज़ को जानने की बेहद उत्सुकता रहती थी। वह बेहिचक सपने देखता थाऔर उन्हें हकीकत में बदलने की काबिलियत रखता था। वह परिवार की प्रेरणा और गौरव था। 

उसका टेलिस्कोप उसके लिए सबसे कीमती चीज थी, जिससे वह सितारों को निहारता था। हम इस बात को स्वीकार नहीं पा रहे कि अब हमें उसकी हंसी सुनने को नहीं मिलेगी। उसकी चमकती आंखें हम कभी देख पाएंगे। हमें उसकी साइंस से जुड़ी कभी न खत्म होने वाली बातें सुनने को नहीं मिलेंगी। उसके जाने से परिवार में हमेशा के लिए खालीपन आ गया है जो कभी नहीं भर पाएगा। वह अपने हर फैन से बहुत प्यार करता था। 

हमारे गुलशन पर इतना प्यार बरसाने के लिए धन्यवाद। उसकी यादों और विरासत को आगे ले जाने के इरादे से अब परिवार सुशांत सिंह राजपूत फाउंडेशन की स्थापना करने जा रहा है, जिसके जरिए सिनेमा, साइंस और स्पोर्ट्स से जुड़ी युवा प्रतिभाओं को मौका दिया जाएगा। उसका राजीव नगर, पटना में स्थित बचपन का घर अब मेमोरियल में तब्दील कर दिया जाएगा। हम उसके पर्सनल सामान जैसे किताबों, टेलिस्कोप, फ्लाइट सिम्युलेटर को वहां रखेंगे, ताकि उसके चाहने वाले उन्हें देख सकें।

अब से हम उसके इंस्टाग्राम, ट्विटर और फेसबुक पेज को यादगार अकाउंट के रूप में चलाएंगे, जिसके जरिए उनकी यादें सदा जिंदा रहेंगी।

हम आपकी प्रार्थनाओं के लिए शुक्रगुजार हैं।

 सुशांत का परिवार

परिवार का स्टेटमेंट।

14 जून को हुआ था निधन: सुशांत ने 14 जून की सुबह अपने मुंबई स्थित घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। 15 जून को उनका अंतिम संस्कार मुंबई में किया गया था। अस्थि विसर्जन पटना में किया गया था। 

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