...... लाश को जंगल में पेड़ से बांधकर घर लौट गए परिजन
अमानवीयता / गर्भवती की मौत के बाद गांव के प्रमुख ने नहीं करने दिया अंतिम संस्कार, लाश को जंगल में पेड़ से बांधकर घर लौट गए परिजन
- नौ महीने की गर्भवती महिला की मौत होने पर गांव वालों ने उसका अंतिम संस्कार करने पर आपत्ति जताई
- गांव वालों ने घटना के बारे में एसआई को जानकारी दी, उन्होंने कहा कि परिजनों से बात कर अंतिम संस्कार किया जाएगा
दैनिक भास्कर
Jun 29, 2020, 10:08 PM ISTकर्नूल. आंध्र प्रदेश के रुद्रावरम मंडल क्षेत्र के बी नागिरेड्डीपल्ले गांव में एक अमानवीय घटना सामने आई है। 9 महीने की गर्भवती महिला की मौत होने पर गांव वालों ने उसका अंतिम संस्कार करने पर आपत्ति जताई। गांव वालों ने कहा कि पेट में बच्चा रहते समय अंतिम संस्कार नहीं किया जा सकता। ऐसा करना गांव के लिए अशुभ होगा। इसके बाद मजबूर होकर परिजन शव को जंगल में एक पेड़ से बांधकर लौट गए।
बी. नागिरेड्डीपल्ले गांव के रहने वाले धर्मेंद्र से लावण्या (20) की डेढ़ साल पहले शादी हुई थी। नौ महीने गर्भवती लावण्या को लेबर पेन के बाद शुक्रवार को शिरवेल्ली गांव से नंद्याल सरकारी अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों की लापरवाही के कारण लावण्या की डिलवरी होने से पहले ही मौत हो गई। परिजन शनिवार को महिला के शव को बी नागिरेड्डीपल्ले लेकर आए और अंतिम संस्कार की तैयारी करने लगे। इसी दौरान गांव के प्रमुख वहां पहुंचे और पेट में बच्चा रहने के कारण अंतिम संस्कार करने पर आपत्ति जताई।
गांव के प्रमुख ने कहा कि महिला के गर्भ में बच्चा रहते समय अंतिम संस्कार करना गांव के लिए बुरा होता है। लाचार होकर परिजन आधी रात को महिला के शव को एक वाहन में रखकर नल्लमला जंगल में लेकर गए। अप्पनपल्ले गांव के पुलिबोनु नदी के पास एक पेड़ से महिला के शव को रस्सी से बांध दिए और लौट आए।
रविवार को रुद्रवरम, गोनमपल्ले और अप्पनपल्ले गांव के लोगों को रास्ते में फूल मिले। कुछ लोगों ने आगे जाकर देखा तो एक पेड़ से महिला का शव बंधा हुआ दिखाई दिया। यह देखकर वो डर गए और वापस गांव लौट गए।
इसके बाद गांव वालों ने इस घटना के बारे में एसआई राम मोहन रेड्डी को जानकारी। उन्होंने मीडिया को बताया कि मृतक परिजन और गांव वालों से बातचीत करके अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
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