सुलह का रास्ता खुला होने के संकेत /

सुलह का रास्ता खुला होने के संकेत / पायलट ने दिनभर चुप्पी साधे रखी, गहलोत ने एक बार भी पायलट का नाम नहीं लिया, रेजोल्यूशन में भी डिप्टी सीएम का जिक्र नहीं

वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के रवैये से भी ऐसा लग रहा है कि पार्टी पायलट को मनाने की कोशिश में जुटी हुई है।- फाइल फोटोवरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के रवैये से भी ऐसा लग रहा है कि पार्टी पायलट को मनाने की कोशिश में जुटी हुई है।- फाइल फोटो

  • राजस्थान में दिनभर की उठापटक में सचिन का कोई बयान सामने नहीं आया
  • गहलोत ने भी एक बार भी सचिन पायलट का नाम सावर्जनिक तौर पर नहीं लिया

दैनिक भास्कर

Jul 13, 2020, 09:06 PM IST

जयपुर. राजस्थान का सियासी संकट दिलचस्प मोड़ पर है। सचिन पायलट के रुख को देखकर माना जा रहा था कि अब वे कांग्रेस से बगावत के रास्ते पर आगे बढ़ चुके हैं। लेकिन, सोमवार की शाम तक नजारा कुछ बदलता नजर आया। अब इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस आलाकमान पायलट और गहलोत के बीच सुलह का रास्ता तलाश रहा है। इसके तीन संकेत नजर आए।  

1- पायलट चुप रहे, गहलोत भी कुछ नहीं बोले
सोमवार को दिनभर राजनीतिक सरगर्मी चलती रही। लेकिन, न तो पायलट का कोई बयान सामने आया और न ही गहलोत ने सार्वजनिक तौर पर सचिन पायलट का नाम लिया। यह साफ था कि पायलट विधायक दल की बैठक में नहीं जाएंगे। तब इस चर्चा ने जोर पकड़ा था कि पार्टी बैठक में न जाने पर पायलट को पार्टी से निकाला जा सकता है। लेकिन सोमवार के घटनाक्रम में रणदीप सुरजेवाला ने भी पायलट के लिए अपना नरम रुख रखा। प्रेस कान्फ्रेंस मे उन्होंने भाजपा पर ही निशाना साधा। विधायक दल की बैठक में भी एक प्रस्ताव पास हुआ। इसमें अनुशासनहीनता करने वाले विधायकों को पार्टी से बाहर करने का जिक्र था। इसमें भी पायलट का नाम लिए बिना प्रस्ताव पास किया गया।


2- पहले पायलट के पोस्टर हटाए गए, फिर लगाए गए
सोमवार सुबह जयपुर कांग्रेस कार्यालय से पायलट के पोस्टर हटा दिए गए। तब इस चर्चा ने और जोर पकड़ लिया कि पायलट का कांग्रेस से संबंध टूटने वाला है। लेकिन थोड़ी देर बाद पायलट के पोस्टर हटा लिए गए। आरोप था कि एनएसआईयू के कार्यकर्ता ने पोस्टर हटाया है। लेकिन बाद में एनएसआईयू के अध्यक्ष ने कहा कि पायलट के पोस्टर हटाने वाले आसामाजिक तत्व थे। उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।   

3-पायलट के भाजपा करीब जाने का कोई इशारा नहीं मिला 
दिल्ली में मौजूद सचिन पायलट रविवार को आक्रामक नजर आ रहे थे। यहां तक खबर आई थी कि वे सोमवार को भाजपा में शामिल हो जाएंगे। लेकिन सोमवार को पायलट खेमा पूरी तरह चुप रहा। दिल्ली में भी पायलट खेमे की कोई ऐसी गतिविधि नहीं दिखी कि वे भाजपा के करीब जा रहे हैं। दोपहर बाद खबर आई कि पायलट भाजपा में शामिल नहीं होंगे।

इन संकेतों के राजनीतिक मायने?

इन बातों का सियासी जानकार यह मतलब निकाल रहे हैं कि कांग्रेस आलाकमान सुलह का रास्ता तलाशने के लिए पायलट की कुछ मांगे मान सकता है। जैसे पायलट समर्थकों को दिया गया एसओजी नोटिस वापस लिया जाएगा। पायलट, प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने की खबरों से भी नाराज चल रहे थे। उनका प्रदेश अध्यक्ष पद बरकरार रखा जा सकता है।आलाकमान पायलट की यह मांग भी मान सकता है कि गहलोत अपनी सरकार में दूसरा उपमुख्यमंत्री नहीं बनाएंगे। पायलट की नाराजगी की एक वजह यह भी बताई जाती है कि गहलोत सरकार में एक और उपमुख्यमंत्री बनाने की सोच रहे हैं। 

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